केमिकल लोचे के शिकार.....

पहचान कौन???

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मैं कौन हूँ, मैं क्या कहूं? तुझमे भी तो शामिल हूँ मैं! तेरे बिन अधूरा हूँ! तुझसे ही तो कामिल हूँ मैं!

आपको पहले भी यहीं देखा है....!!!

शनिवार, 20 अक्तूबर 2012

ए फीलिंग कॉल्ड.....

निशां बाकी ना रहे वक़्त की रेत पर.....

इन अलमस्त लहरों से कहो के मिटाती  जाएँ!!!



इस अहसास को क्या कहते हैं,
नहीं मालूम मुझे!
पर जी चाहता है कि,
तेरी बाँह थामे ज़िंदगी का सफ़र कट जाए!
यूँही बेवजह खो जाएँ दोनों किसी अजनबी शहर में!
बेपरवाह घूमें, ना ढूँढें और ना ही राह पायें!

इस अहसास को क्या कहते हैं,
नहीं मालूम मुझे!
पर जी चाहता है कि,
अपने अश्कों से भिगो दूँ दामन तेरा!
मैं ज़ाहिर ना करूँ तुझपर सोज़ अपना,
मेरी ख़ामोशी का साज़ तू खुद ही समझ जाए!

इस अहसास को क्या कहते हैं,
नहीं मालूम मुझे!
पर जी चाहता है कि,
तेरी हँसी के आबशार में भीगता रहूँ!
बहती रहे तू कल-कल, पल-पल, अविरल!
मैं वजह देता जाऊँ और तू खिलखिलाए!

इस अहसास को क्या कहते हैं,
नहीं मालूम मुझे!
पर जी चाहता है कि,
साँसें साँसों में घुल जाएँ!
रूह रूह से जी भर के मिले गले!
किसी रोज़ इस सफ़र में तू मेरे इतने करीब आये!

इस अहसास को क्या कहते हैं,
नहीं मालूम मुझे!
पर जी चाहता है कि,
मैं बेफ़िक्र हो जाऊँ!
तुझे सौंपकर अपनी साँसों का हिसाब!
खुशियाँ जोड़े तू और ग़मों को घटाये!

इस अहसास को क्या कहते हैं,
नहीं मालूम मुझे!
पर जी चाहता है कि,
उड़ते रहें फ़लक पर हम!
तू डोर मैं पतंग, मैं सूफ़ी तू मलंग!
यूँही उड़ते-उड़ते इश्क़ की मे'राज आये!

इस अहसास को क्या कहते हैं,
नहीं मालूम मुझे!
पर जी चाहता है कि,
हर लम्हा घूँट-घूँट पियें हम!
इस जाम-ए-वस्ल के कैफ़ में डूबे-डूबे,
तेरा साथ हो और ज़िन्दगी की शाम आये! 

उर्दू हैल्पडेस्क:
सोज़: Grief, Pain  
आबशार: Waterfall  
मे'राज: Ascent, Ladder 
वस्ल: Union, Meeting, Connection 
कैफ़: Intoxication  

पी  एस/ डिस्क्लेमर: 
इश्क़ बेखुदी का दूसरा नाम है और ढ़पोरशंख खुदगर्ज़ी  का पहला ! 
अगर फिर भी कोई फ़ना होने पर आमादा हो, तो अल्लाह उसकी खैर करे!
फ़ैशन के इस दौर में गारण्टी की इच्छा ना करें!
हमारी कोई अन्य ब्रांच नहीं है! 
 
फोटू: गूगल घुमक्कड़

32 टिप्‍पणियां:

अनाम ने कहा…

har line ye bayan karti hai ki ishq ka mara hai tu ,,,

Janta hai haale dil par phir bhi sankoch ka mara hai tu,,,

Gulam ali ki ek gazal hai,,,,

Mera naam hai muhhabat, meri arzoo yahi hai,,
Tere naam pe jhuke sar,
meri bandigi yahi,,


Baki hamesa ki tarah kavita ati uttam,,

monali ने कहा…

Ohooo.. lagta h fir se lovaria k virus ne h amla kia h.. :P
Is baar khuda khair kare aapki... :)

Zindagi ko seriously bhi lijiye ;)

sonal ने कहा…

Sulabh Jaiswal "सुलभ" ने कहा…

वो इक अहसास को क्या नाम दें हम
जुबाँ पर दर्द आ बन जाये दुआ तो...

संजय @ मो सम कौन... ने कहा…

पहले भी कहा है फ़िर से कह देते हैं, you are so unique कि कोई और ब्रांच हो भी नहीं सकती:)

Randhir Singh Suman ने कहा…

nice

यशवन्त माथुर (Yashwant R.B. Mathur) ने कहा…

कल 21/10/2012 को आपकी यह खूबसूरत पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

बेहतरीन, वाह क्या कहने।

वाणी गीत ने कहा…

कुछ अहसास बस समझे जा सकते हैं , यही लगा !
काश की जीवन खुशनुमा अहसास के सहारे ही गुजर जाता !
बहुत खूब !

ANULATA RAJ NAIR ने कहा…

वाह....
बहुत खूबसूरत.........
ऐसी खूबसूरत रचना पढ़ने को कम मिला करती है...

अनु

Prakash Jain ने कहा…

Waah!! Behatareen

Superb expression...

मेरा मन पंछी सा ने कहा…

बहुत ही सुन्दर रचना...
:-)

मेरा मन पंछी सा ने कहा…

बहुत ही सुन्दर रचना...
:-)

धीरेन्द्र अस्थाना ने कहा…

Bhayee maja agya! Kayee dino bad kuchh dil ko chhua hai.

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" ने कहा…

यूँही बेवजह खो जाएँ दोनों किसी अजनबी शहर में!
बेपरवाह घूमें, ना ढूँढें और ना ही राह पायें!

वाह, क्या कहने, सुन्दर पंक्तियाँ !

kuldeep thakur ने कहा…

दोस्त कहा है दोस्ती निभानी भी पड़ेगी... जो घटना घट जाती है उसका परिणाम तो भुगतना ही पड़ता है... पर आप की रचना मन को मोह लेने वाली है।

Bharat Bhushan ने कहा…

आपने कविताई में ऐसा इश्टाइल मारा है कि आह भी निकलती है और वाह भी निकलती है.

Rewa Tibrewal ने कहा…

wah ! pyar aur ehsaso say bhari rachna.....

P.N. Subramanian ने कहा…

बहुत सुन्दर. बस यों ही कट जाती है जिंदगियां सबकी.

P.N. Subramanian ने कहा…

बहुत सुन्दर. बस यों ही कट जाती है जिंदगियां सबकी.

इमरान अंसारी ने कहा…

वाह बहुत खुबसूरत तस्वीर जो चिपकाया है वो शेर सबसे उम्दा ।

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

नहीं मालूम कि इन एहसासों को क्या कहते हैं .... पर बहुत खूबसूरत एहसास हैं ...

Madan Mohan Saxena ने कहा…

बहुत अद्भुत अहसास...सुन्दर प्रस्तुति .पोस्ट दिल को छू गयी.......कितने खुबसूरत जज्बात डाल दिए हैं आपने..........बहुत खूब,बेह्तरीन अभिव्यक्ति .आपका ब्लॉग देखा मैने और नमन है आपको और बहुत ही सुन्दर शब्दों से सजाया गया है लिखते रहिये और कुछ अपने विचारो से हमें भी अवगत करवाते रहिये.

Satish Saxena ने कहा…

बढ़िया अहसास ...
मंगल कामनाएं आपकी कलम को !

Kailash Sharma ने कहा…

इस अहसास को क्या कहते हैं,
नहीं मालूम मुझे!
पर जी चाहता है कि,
मैं बेफ़िक्र हो जाऊँ!
तुझे सौंपकर अपनी साँसों का हिसाब!
खुशियाँ जोड़े तू और ग़मों को घटाये!

...वाह! दिल को छूते लाज़वाब अहसास..

रचना दीक्षित ने कहा…

तुझे सौंपकर अपनी साँसों का हिसाब!
खुशियाँ जोड़े तू और ग़मों को घटाये!


सुंदर विचार, खूबसूरत कविता.

रश्मि प्रभा... ने कहा…

जो भी कहते हों इस एहसास को
तुम मेरा हर एक लम्हा बन जाओ
कोई फर्क ना रहे
कभी तुम समंदर कभी मैं ..... जो भी नाम हो इस एहसास का ... वह नाम साकार हो जाये

lori ने कहा…

सुभान अल्लाह !!!
खूबसूरत !

"इस अहसास को क्या कहते हैं,"
जनाब! इस अहसास को क्या कहें
सिर्फ अहसास है ये रूह से महसूस करो .....
सच! ये न रुकती है, न झिझकी है, न ठहरी है कहीं
नूर की बूँद है, सदियों से बहा करती है ........
जो कहें, कलाम ने दिल जीत लिया .

lori ने कहा…

सुभान अल्लाह !!!
खूबसूरत !

"इस अहसास को क्या कहते हैं,"
जनाब! इस अहसास को क्या कहें
सिर्फ अहसास है ये रूह से महसूस करो .....
सच! ये न रुकती है, न झिझकी है, न ठहरी है कहीं
नूर की बूँद है, सदियों से बहा करती है ........
जो कहें, कलाम ने दिल जीत लिया .

रश्मि प्रभा... ने कहा…

http://bulletinofblog.blogspot.in/2012/11/blog-post.html

रश्मि प्रभा... ने कहा…

http://bulletinofblog.blogspot.in/2012/11/blog-post.html

lori ने कहा…

http://meourmeriaavaaragee.blogspot.in/