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शनिवार, 1 जनवरी 2011

हमहूँ छोड़के सारी दुनिया पागल!!!

लोग कहते हैं के जो बिना मतलब हँसते हैं वो पागल होते हैं. मैं कहता हूँ के जो हंसने के लिए भी मतलब ढूंढें वो पागल होते हैं. इसलिए आज की पोस्ट का टाईटल: हमहूँ* छोड़के सारी दुनिया पागल!!!  (* हमहूँ में मेरी प्रजाति के सभी लोग शामिल हैं. आप हैं?)
उडुपी (कर्णाटक) की गलियों में. पूरा फोटो, फिर कभी.....
हंसने-हंसाने पर याद आया. अभी पिछली बार जब सुपर से घर जा रहा था, तो ट्रेन में दो छोटे-छोटे बच्चे चढ़े. मार्बल बजा रहे थे और सुर में सुर मिला रहे थे. एक लाइन मेरे दिमाग में साहित्यिक छिपकली बनके घूमती रहती है. पढ़िए, मुझे आवाज़ लोड नहीं करनी आती और कुछ ये मुआ कनेक्शन स्लो है, नहीं तो गा के भी सुनाता और माउथ-ऑर्गन पर बजा के भी:
कुछ लोग ज़माने में ऐसे भी तो होते हैं.
महफ़िल में तो हँसते हैं, तन्हाई में रोते हैं!
लोगों और ज़माने पर लिखे दो पुराने मुक्तक शेयर कर रहा हूँ. ये प्यार भी अजीब चीज़ है. कहाँ-कहाँ और किस-किस अवस्था में कविता नहीं करी? मोटरसाईकल चलाते-चलाते, क्लास में पढ़ाते-पढ़ाते, सुबह पोट्टी में बैठे-बैठे, रात को सोते-सोते. मुझे अच्छे से याद है, कई बार रात में अचानक से उठ जाता, मोबाईल में कुछ लाईनें टाईप करता और फिर से सो जाता. फिर ये लाईनें सुबह पोट्टी में बैठे-बैठे तुकबंदी की शक्ल लेतीं!!! खैर, ये सब तो अब वंस अपोन ए टाईम की बातें हैं. और ये दोनों कहाँ लिखीं याद नहीं. 
 (1)
गवाह तारीख है दुश्मन मुहब्बत का ज़माना है.
किसलिए इतनी नफरत के जब आना और जाना है?!
ज़माने की जफ़ाओं का जवाब है मेरे पास वफ़ा.
कहते हैं इसलिए लोग के पागल है दीवाना है!

(2)
दीवाना हूँ, दीवानों को दीवाना लोग कहते हैं.
मुहब्बत है इबादत, जाने क्यूँ इसे रोग कहते हैं?!
अगर ये रोग है तो ऐसा हो जो छूने से फैले,
मिलेगा जो कोई भी मुझे, गले से उसे लगा लूँगा! 

चलते-चलते नए साल में पुराना गुरु-मन्त्र: ज़िंदगी को सीरियसली नहीं, सिंसिअर्ली लीजिये. खुश रहिये!
आई लव यू आल! 
बिलीव मी! 
हा हा हा!!!

54 टिप्‍पणियां:

मो सम कौन ? ने कहा…

ओये,
यू लव अस आल या वी आल लव यू?
खैर गल्ल ताँ इक ही है।
नये साल पर हमारा उपदेश\संदेश भी सुन ले छोटे वीर - ये पागलपन बरकरार रहे।
(कमेंट चोरी का है। मुझे कहा था किसी ने, मैं आगे पॉस-आन कर रहा हूँ)
regards,
sincerely non serious:)

यशवन्त माथुर ने कहा…

आप को सपरिवार नववर्ष 2011 की हार्दिक शुभकामनाएं .

बहुत बदल गए हैं सर आप तो.और आपके ब्लॉग पर आकर आप का लिखा पढना बिलकुल अलग ही एहसास जगाता है.

ब्लॉग पर आवाज़ लोड करना बहुत ही आसान है-एक बार-www.divshare.com पर ID बना लीजियेगा.बाकी आप आप खुद समझ जायेंगे.

आदरणीया आंटी जी और अंकल जी को मेरा चरण स्पर्श कहियेगा.

सादर
यशवंत

मनोज कुमार ने कहा…

सर्वस्तरतु दुर्गाणि सर्वो भद्राणि पश्यतु।
सर्वः कामानवाप्नोतु सर्वः सर्वत्र नन्दतु॥
सब लोग कठिनाइयों को पार करें। सब लोग कल्याण को देखें। सब लोग अपनी इच्छित वस्तुओं को प्राप्त करें। सब लोग सर्वत्र आनन्दित हों
सर्वSपि सुखिनः संतु सर्वे संतु निरामयाः।
सर्वे भद्राणि पश्यंतु मा कश्चिद्‌ दुःखभाग्भवेत्‌॥
सभी सुखी हों। सब नीरोग हों। सब मंगलों का दर्शन करें। कोई भी दुखी न हो।
बहुत अच्छी प्रस्तुति। नव वर्ष 2011 की हार्दिक शुभकामनाएं!

साल ग्यारह आ गया है!

shekhar suman ने कहा…

और सर जी इन लाईनों की बात ही क्या है, व्हाहे कहीं भी लिखी हो लिखी तो दिल से ही हैं...
:)
नया साल मुबारक हो...

ललित शर्मा ने कहा…

हा हा हा
बस यूँ ही दिल में प्यार का दीप जलाएं रक्खें।

नूतन वर्ष की बधाईयाँ।

इमरान अंसारी ने कहा…

वाह....आशीष जी......पोट्टी में बैठकर बढ़िया मुक्तक लिख दिए है आपने....वैसे कुछ भी सोचने की सबसे शानदार जगह तो वही है.....कुछ शब्द आप कमाल के लाते हो.....साहित्यिक छिपकली....वाह जी क्या बात है....लगे रहो भाई....

नववर्ष की हार्दिक शुभकामनायें|

monali ने कहा…

I guess i too belong to ur category n lyk ol ur fans I too love you :)

Post k baare me kuchh nahi bt yeah.. Happy new year :)

Mukesh Kumar Sinha ने कहा…

aapke gurumantra ko yaad rakhunga...bilkul sach kaha seriously nahi sincerely lene k liye:)


happy new year dost!

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

पहले दिन ही मन जीत लिया, हँसने के लिये विशेष कारण की आवश्यकता नहीं, छोटे छोटे कारण दिख जाते हैं।

सुलभ § Sulabh ने कहा…

बधाई हो बधाई...
हमारी इस महफ़िल में ये साल कब गुजरा पता न चला..
लगे रहो आशीष भाई!!

sada ने कहा…

बहुत ही सुन्‍दर लेखन ....जीवंतता के निकट हर अहसास को शब्‍दों में उतार दिया है आपने ...बधाई के साथ नववर्ष की शुभकामनायें ...।

deepak saini ने कहा…

आप को सपरिवार नववर्ष 2011 की हार्दिक शुभकामनाएं .

we all love u

boletobindas ने कहा…

अच्छा किया जो सभी प्रजातियों की बात कर ली। वरना जाने क्या कर डालता। भैया हम तो हंसते भी हैं औऱ रोने को मन करता है तो दुखी हो लेते हैं। हमें दूसरों से क्या अपना दुख तो अपने अंदर डाल कर फिर से हंसने लगते हैं। हां कभी काफी तोड़फोड़ कर डालते थे। पर अब नहीं।
आखिर वादा किया है जो निभाना पड़ेगा। तुम्हें
नहीं आना है याद रखना भूल न जाना।
अब औऱ तुकबंदी का मूड नहीं, वरना बड़ी-बड़ी लाइने याद आ रही हैं दिमाग में.....जैसे मुन्नी की जवानी, शीला की बदनामी.....वगैरह वगैरह......

वइसे नया साल मुबाकर हो। और इसी तरह से ढोलक बजाते रहो, मजमा इक्कठा हो न हो.....खिलखिला के हंसते रहो। ग़म की ऐसी की तैसी.....

राज भाटिय़ा ने कहा…

भाई आज सुबह सुबह सब से पहले आप की मेल पढी, फ़िर स्वाद चखने के लिये इस ब्लाग पर आया, सच कहुं मजा आ गया जी बहुत सुंदर बाते कही आप ने मजाक मजाक मे, अगर आप यह ब्लाग सब मे बांटना चाहते हे, ओर आप अपने अन्य ब्लाग भी ओर दोस्तो के ब्लाग भी सब मे बांटना चाहते हे तो.... यहां भी आ कर स्वाद लेले..
http://blogparivaar.blogspot.com/

रवि धवन ने कहा…

आपको नए साल की शुभकामनाएं
इसी तरह खुश रहें
और फिर से पुराने समय जैसी कविताएं शुरू कर दें।

नीरज गोस्वामी ने कहा…

बल्ले बल्ले जी आपकी और हमारी सोच एक है...इश्वर ने रोते हुए इंसान को जरूर जमीन पर भेजा लेकिन हर टाइम रोने के लिए नहीं...लोग पैदाइश से लेकर मरने तक रोते ही रहते हैं...बिचारे...
आपके अशार बहुत दमदार लगे...हमेशा ही लगते हैं...
एक शेर सुनो...शुक्र है मेरा नहीं है...

निगाहे-कम से मेरी चाक दामानी को मत देखो
(याने मेरे फटे कपड़ों को हिकारत की नज़र से मत देखो)
निगाहे-कम से मेरी चाक दामानी को मत देखो
हजारों होशियारों में कोई दीवाना बनता है

नीरज

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत बढ़िया बात कही ...ज़िंदगी को हंसते हंसते ही गुजारना चाहिए ...


नव वर्ष की शुभकामनाएँ

Jyoti ने कहा…

नए साल की हार्दिक शुभकामनायें

संजय भास्कर ने कहा…

आप को सपरिवार नववर्ष 2011 की हार्दिक शुभकामनाएं .

आशीष/ ਆਸ਼ੀਸ਼ / ASHISH ने कहा…

@ संजय बाऊ जी (मो सम कौन?)
ये चोरी के कमेन्ट पास-ऑन करने की आदत बना ली है आपने!!!
रहोगे तो बैंकर ही ना! कोई आपके पास जमा करा जाता है, और आप उसे आगे उधार पे दे देते हो!!!
हा हा हा.....

@ यशवंत,
सिर्फ चश्मे का फर्क है यशवंत, और तुम्हारे लिए शायद दाढ़ी का भी. वैसे मैं इतना समझदार नहीं हूँ, फिर भी डिवशेयर ट्राई करूंगा.

@ इमरान,
यकीन मानना मुझे तो बेस्ट आईडियाज़ पोट्टी में ही आते हैं. एवरी एक्शन हैज़ इकुवल एंड अपोजिट रिएक्शन!!!
हा हा हा.... बहादुर हो दोस्त, कम-से-कम क़ुबूल तो फरमाया!

@ मोनाली,
I guess i too belong to ur category n lyk ol ur fans I too love you :)
मैं आलरेडी कन्फ्यूज्ड हूँ, कम-से-कम फ्यूज़ ना करो!!!
हा हा हा!!!

@ रोहित (बोले तो बिंदास)
यार फोटो के नीचे का कैप्शन पढ़ा?
पूरी फोटो फिर कभी..............
मजमा भी दिखायेंगे, इन्श'अल्लाह!

@ रवि,
देखो यार प्यार कर बैठे फिर से तो अपने आप होने लगेगी कविताई!

सुशील बाकलीवाल ने कहा…

पोट्टी उत्पादित आपकी हँसने-हँसाने की रचनाओं का आगे भी आनन्दलाभ लिया जा सके इस निमित्त मैं आपके ब्लाग को फालो भी कर रहा हूँ । मेरे भी ब्लाग पर यदि आप तफरीह करने आना चाहें तो स्वागत है आपका...
http://najariya.blogspot.com/ नजरिया.
http://jindagikerang.blogspot.com/ जिन्दगी के रंग.
नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाओं सहित...

इंदु पुरी गोस्वामी ने कहा…

दुसरे नम्बर पर कमेन्ट मारा था मैंने.एरर शो हुआ और कमेन्ट गायब. सोचा ये लड़का मुझे उल्टा लटका देगा कि मैंने उसकी पोस्ट कयों नही पढ़ी.अब कैसे यकीन दिलाऊँ कि दो बार पूरी पढ़ चुकी किन्तु सबूत???वो तो कमेंट्स ही होते है न?हा हा पढ़ने के? धत्त ब्लॉग पर आने के.
एक बात बताओ ये कुछ लोग 'स' को 'श' को
क्यों बोलते हैं?बेचारे सोचालय को?????
वैसे किसी को बताना मत हर भूली बात,प्लानिंग सब अपनी भी वहीं होती है.ढोलकी और माऊथ ओरगन बजा लेते हो.छुपे रुस्तम हो.मुझे तो ये मालूम ही नही था और गानों के भी शौक़ीन.दोस्त! फिर तो तेरी मेरी खूब पटेगी.
'किसलिए इतनी नफरत के जब आना और जाना है?'बस यही तो लोग समझना नही चाहते जानते सब हैं.
'दीवाना हूँ, दीवानों को दीवाना लोग कहते हैं.मुहब्बत है इबादत, जाने क्यूँ इसे रोग कहते हैं?!अगर ये रोग है तो ऐसा हो जो छूने से फैले,मिलेगा जो कोई भी मुझे, गले से उसे लगा लूँगा!'और मैं इस रोग को फैलाने वाले तुझे गले लगा लूंगी.ईश्वर करे ये रोग लाइलाज हो जाये जिसे लगे,लोग आये इसके बिना पर इस दुनिया से जाएँ तो....इसके साथ जाएँ.चिंता ना करो ये खत्म नही होता.
प्यार और नया साल... हाय अब तो कोई कुडी मेरे मूंदे नु पसंद आ जाये .तु दो और दो से चार हो जाए.
तेरी गर्ल फ्रेंड
इंदु

इंदु पुरी गोस्वामी ने कहा…

दुसरे नम्बर पर कमेन्ट मारा था मैंने.एरर शो हुआ और कमेन्ट गायब. सोचा ये लड़का मुझे उल्टा लटका देगा कि मैंने उसकी पोस्ट कयों नही पढ़ी.अब कैसे यकीन दिलाऊँ कि दो बार पूरी पढ़ चुकी किन्तु सबूत???वो तो कमेंट्स ही होते है न?हा हा पढ़ने के? धत्त ब्लॉग पर आने के.
एक बात बताओ ये कुछ लोग 'स' को 'श' को
क्यों बोलते हैं?बेचारे सोचालय को?????
वैसे किसी को बताना मत हर भूली बात,प्लानिंग सब अपनी भी वहीं होती है.ढोलकी और माऊथ ओरगन बजा लेते हो.छुपे रुस्तम हो.मुझे तो ये मालूम ही नही था और गानों के भी शौक़ीन.दोस्त! फिर तो तेरी मेरी खूब पटेगी.
'किसलिए इतनी नफरत के जब आना और जाना है?'बस यही तो लोग समझना नही चाहते जानते सब हैं.
'दीवाना हूँ, दीवानों को दीवाना लोग कहते हैं.मुहब्बत है इबादत, जाने क्यूँ इसे रोग कहते हैं?!अगर ये रोग है तो ऐसा हो जो छूने से फैले,मिलेगा जो कोई भी मुझे, गले से उसे लगा लूँगा!'और मैं इस रोग को फैलाने वाले तुझे गले लगा लूंगी.ईश्वर करे ये रोग लाइलाज हो जाये जिसे लगे,लोग आये इसके बिना पर इस दुनिया से जाएँ तो....इसके साथ जाएँ.चिंता ना करो ये खत्म नही होता.
प्यार और नया साल... हाय अब तो कोई कुडी मेरे मूंदे नु पसंद आ जाये .तु दो और दो से चार हो जाए.
तेरी गर्ल फ्रेंड
इंदु

इंदु पुरी गोस्वामी ने कहा…

दुसरे नम्बर पर कमेन्ट मारा था मैंने.एरर शो हुआ और कमेन्ट गायब. सोचा ये लड़का मुझे उल्टा लटका देगा कि मैंने उसकी पोस्ट कयों नही पढ़ी.अब कैसे यकीन दिलाऊँ कि दो बार पूरी पढ़ चुकी किन्तु सबूत???वो तो कमेंट्स ही होते है न?हा हा पढ़ने के? धत्त ब्लॉग पर आने के.
एक बात बताओ ये कुछ लोग 'स' को 'श' को
क्यों बोलते हैं?बेचारे सोचालय को?????
वैसे किसी को बताना मत हर भूली बात,प्लानिंग सब अपनी भी वहीं होती है.ढोलकी और माऊथ ओरगन बजा लेते हो.छुपे रुस्तम हो.मुझे तो ये मालूम ही नही था और गानों के भी शौक़ीन.दोस्त! फिर तो तेरी मेरी खूब पटेगी.
'किसलिए इतनी नफरत के जब आना और जाना है?'बस यही तो लोग समझना नही चाहते जानते सब हैं......
आगे और भी है मेरे व्यूज़.एक बार में तो स्वीकार ही नही कर रहा तेरा ये कमेन्ट वाला.

इंदु पुरी गोस्वामी ने कहा…

............और आगे पढ़ो.माथा मत पीट लेना.क्या करूं ऐसिच हूँ मैं तो.
तो आगे लिखा है..........'''दीवाना हूँ, दीवानों को दीवाना लोग कहते हैं.मुहब्बत है इबादत, जाने क्यूँ इसे रोग कहते हैं?!अगर ये रोग है तो ऐसा हो जो छूने से फैले,मिलेगा जो कोई भी मुझे, गले से उसे लगा लूँगा!'और मैं इस रोग को फैलाने वाले तुझे गले लगा लूंगी.ईश्वर करे ये रोग लाइलाज हो जाये जिसे लगे,लोग आये इसके बिना पर इस दुनिया से जाएँ तो....इसके साथ जाएँ.चिंता ना करो ये खत्म नही होता.
प्यार और नया साल... हाय अब तो कोई कुडी मेरे मूंदे नु पसंद आ जाये .तु दो और दो से चार हो जाए.'
तेरी गर्ल फ्रेंड

anu ने कहा…

आप का गुरु मंत्र हमेशा याद रहेगा ..... :)

खबरों की दुनियाँ ने कहा…

अच्छी पोस्ट ,नववर्ष की शुभकामनाएं । "खबरों की दुनियाँ"

खबरों की दुनियाँ ने कहा…

अच्छी पोस्ट ,नववर्ष की शुभकामनाएं । "खबरों की दुनियाँ"

निर्मला कपिला ने कहा…

हंसते रहो हंसाते रहो। आपको सपरिवार नये साल की हार्दिक शुभकामनायें।

वाणी गीत ने कहा…

किसलिए इतनी नफरत के जब आना और जाना है?!

यही लोग समझ जाते तो दुनिया स्वर्ग नहीं हो जाती ...फिर भी जो दुनिया टिकी हुई है , कुछ पागलों के दम पर ही तो ...एक पागल हम भी हैं ...:)

अच्छा सन्देश ...

नव वर्ष की बहुत शुभकामनायें !

Dorothy ने कहा…

सुंदर और सार्थक संदेश. आभार.

अनगिन आशीषों के आलोकवृ्त में
तय हो सफ़र इस नए बरस का
प्रभु के अनुग्रह के परिमल से
सुवासित हो हर पल जीवन का
मंगलमय कल्याणकारी नव वर्ष
करे आशीष वृ्ष्टि सुख समृद्धि
शांति उल्लास की
आप पर और आपके प्रियजनो पर.

आप को सपरिवार नव वर्ष २०११ की ढेरों शुभकामनाएं.
सादर,
डोरोथी.

हरकीरत ' हीर' ने कहा…

ਓਹ ...ਤੇ ਇਹ ਤਸਵੀਰ ਵਿਚ ਤੁਸੀਂ ਹੋ .....?
ਭਰ ਤੁਸੀਂ ਇਹ ਰੋਡ ਤੇ ਬੈਠੇ ਕੀ ਕਰ ਰਹੇ ਹੋ .....?
ਢੋਲ ਵੀ ਦੋ-ਦੋ ...?
ਬਤ੍ਤੀਸੀ ਸੇ ਸੋਹਨੀ ਆ ....ਪੋਸਟ ਵਰਗੀ ....


अगर ये रोग है तो ऐसा हो जो छूने से फैले,
मिलेगा जो कोई भी मुझे, गले से उसे लगा लूँगा!

ਲਾ ਲਿਓ ਜੀ ਨਸੀਬਾਂ ਵਾਲੀ ਹੋਵੇਗੀ ਜੇਹੜੀ ਲਗੇਗੀ .....
आई लव यू आल! बिलीव मी! हा हा हा!!!
ਓਦੋਂ ਤਕ ਜਦੋਂ ਤਕ ਕੋਈ ਗਲ ਨਹੀਂ ਪੇਂਦੀ ....ਹਾ...ਹਾ...ਹਾ...

Bhushan ने कहा…

नटखटी अंदाज़ से बाज़ आने के लिए जो तुम्हें कहे वही बततमीज़ कहलाएगा. सभी कमेंट्स का यही सार है. मैंने उडुपी में कार्य किया है. तुम फिर ग़लत जगह चले गए यार. यह तुमने अच्छा नहीं किया. वहाँ उषा, कल्पना, मल्लिका होटल हैं. हरकीरत के सवाल का जवाब ज़रूर देना कि वहाँ तुम सड़क छाप क्यों हुए. वैसे आँखों से तुम कन्हैया और दाँतों कटैया लगते हो. मुँह में जीभ है जो गवैये की है. ऐसे ही जिंदगी का गीत गाते रहो. पर मैं तुम्हारे ब्लॉग पर नहीं आऊँगा.

ali ने कहा…

अनंत अशेष सुमंगलकामनायें !

Dimple Maheshwari ने कहा…

जय श्री कृष्ण...आपका लेखन वाकई काबिल-ए-तारीफ हैं....नव वर्ष आपके व आपके परिवार जनों, शुभ चिंतकों तथा मित्रों के जीवन को प्रगति पथ पर सफलता का सौपान करायें .....मेरी कविताओ पर टिप्पणी के लिए आपका आभार ...आगे भी इसी प्रकार प्रोत्साहित करते रहिएगा ..!!

ज्योति सिंह ने कहा…

वाह तारीख है दुश्मन मुहब्बत का ज़माना है.
किसलिए इतनी नफरत के जब आना और जाना है?!
ज़माने की जफ़ाओं का जवाब है मेरे पास वफ़ा.
कहते हैं इसलिए लोग के पागल है दीवाना है!

(2)
दीवाना हूँ, दीवानों को दीवाना लोग कहते हैं.
मुहब्बत है इबादत, जाने क्यूँ इसे रोग कहते हैं?!
अगर ये रोग है तो ऐसा हो जो छूने से फैले,
मिलेगा जो कोई भी मुझे, गले से उसे लगा लूँगा!
bahut badhiya ,hansne hansaane ka silsila yoon hi chalta rahe .duniya kahti hai pagal kahti rahe .rog ye bura nahi ,sehat ke liye nihayat jaroori hai .har baat najuk ahsas liye .nutan barsh ki badhai .

ktheLeo ने कहा…

नववर्ष की मंगल कामना!

दिगम्बर नासवा ने कहा…

आप को सपरिवार 2011 की हार्दिक शुभकामनाएं .... ये जो प्यार है दिल में इसे बांटते चलें ... गागर ख़त्म नहीं होती है ये ....

आशीष/ ਆਸ਼ੀਸ਼ / ASHISH ने कहा…

@ माँ सा,
आई लव यू टू!

@ ਹੀਰ ਜੀ,
ਸਤ ਸ੍ਰੀ ਅਕਾਲ!
ਹਾਂਜੀ ਤਸਵੀਰ ਦੇ ਵਿਚ ਮੈਂ ਹੀ ਹਾਂ!

@ भूषण बाऊ जी,
कसम खाते रहिये, मगर आशीष देने आते रहिये! और मैं सड़क-छाप क्यूँ हुआ? हा हा हा... फिर कभी. फोटो का कैप्शन पढ़िए....

Sonal Rastogi ने कहा…

पहले तो हैप्पी वाला न्यू इयर है जी , आप तो कमाल का लिखते हो.. फोटो ख़ास पसंद आया ... करियर का सेकंड आप्शन भी रहे तो क्या बुराई है ... पोस्ट पढ़कर मज़ा आया साथ में कॉमेंट्स भी गज़ब ...

Patali-The-Village ने कहा…

अच्छा सन्देश|सब मंगलों का दर्शन करें। कोई भी दुखी न हो। धन्यवाद|

Bhushan ने कहा…

मैं फिर लौट आया क्योंकि आपकी फोटो फिर याद आई. आशीष प्यारे उडुपि की मिट्टी तो मोटी और लाल है...पर फोटो में तो....यह मोटी तो है पर लाल नहीं...यह कैसा जंजाल है....कुछ खुल कर बताओ यार...या कहो कि वाकई हमें पागल बना रहे हो.

POOJA... ने कहा…

well... I think we both belong to the same tier... and as per ur "guru mantra" we all love u too... lines are jst too gud... and next time if I'll see such children sure ll also try for "tukbandi"...
happy days...

अबयज़ ख़ान ने कहा…

स्टोरी तो पूरी मस्त है.. लेकिन ढोल के साथ गोल-मटोल लग रहे हो.. मस्त है भाई..

mahendra verma ने कहा…

हंसना-हंसाना भी एक कला है जो सबके पास नहीं होती।
आपके पास यह कला है, आप खु़शनसीबों में से हैं।

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

बहुत खूब ..... पोस्ट की शुरुआत की सीख और आखिरी नसीहत दोनों अच्छे लगे..... मनभावन

Parul ने कहा…

tussi bhi great ho ji :)

क्षितिजा .... ने कहा…

वाह !!.. आपका गुरु मंत्र गांठ बाँध लिया है ...

आपको और आपके परिवार को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ ...

Sunil Kumar ने कहा…

गवाह तारीख है दुश्मन मुहब्बत का ज़माना है.
किसलिए इतनी नफरत के जब आना और जाना है?
bahut khub ashish bhai aap to ek tarikh ko salary ki tarah aate hai ab mahina aram se kat jayega ...

Harman ने कहा…

nice post..
Happy Lohri To You And Your Family..

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यशवन्त माथुर ने कहा…

आप सब को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभ कामनाएं.
सादर
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गणतंत्र को नमन करें

ज्योति सिंह ने कहा…

gantantra divas ki badhai ,doosri baar padhne me aur maja aaya .vande matram .

P.N. Subramanian ने कहा…

बहुत सुन्दर. गीत बनते रहें.

Manpreet Kaur ने कहा…

bouth he aacha post hai aapka dear
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