केमिकल लोचे के शिकार.....

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मैं कौन हूँ, मैं क्या कहूं? तुझमे भी तो शामिल हूँ मैं! तेरे बिन अधूरा हूँ! तुझसे ही तो कामिल हूँ मैं!

आपको पहले भी यहीं देखा है....!!!

मंगलवार, 1 फ़रवरी 2011

हैपिली अनमैरिड!!!

भाईयों और सहेलियों, 
आपमें से जो मेरा ढपोरशंख पहले से झेलते आयें हैं, वो टाईटल देख कर चकित हो सकते हैं. लेकिन उम्र के साथ इंसान (और कभी-कभी शैतान भी) स्याना हो जाता है. मेरा शरीर अब छब्बीस बरस का है.... दिल का क्या? दिल तो बच्चा है जी!!! पिछले  महीने ज़िन्दगी से मुहब्बत के अलावा भी बहुत कुछ किया. 
पहली जनवरी को जब नए साल पर कविता कर रहे थे, पोस्ट लिखने के बाद मैं विचार कर रहा था के नहाऊं या नहीं! हिसाब लगाया के अगर आज से एक दिन छोड़-छोड़ कर नहाना शुरू करूं, तो महीने में 16 मर्तबा नहाना पड़ेगा. वहीं अगर कल से शुरू करूं, तो केवल 15 बार! उसके ऊपर सभी महत्वपूर्ण दिन जैसे मकर-सक्रांति, नदिया का बर्थ-डे, मेरा जन्मदिन, मोनाली जी का बर्थ-डे, रिपब्लिक डे, गांधीजी की पुण्यतिथि सभी इविन डेट्स पर पड़ रहे हैं. तो 2 तारीख से शुरू किया, और 30 पर ख़त्म. कुल मिलाके सर्दी को जमकर सेलिब्रेट किया. बस एक कमी रह गयी*
नए साल में मैंने खुद को एक गिटार गिफ्ट कर लिया है. शुरू किया था 2002 में सीखना, लेकिन कंटिन्यु नहीं कर पाया. अब सोचता हूँ के जब नौकरी डेबिट और क्रेडिट की कुश्ती (संजय बाऊ जी/ भूषण बाऊ जी समर्थन करें!!!) बन ही गयी है, तो क्यूँ ना कुछ  नए मायने और आयाम दिए जाएँ, लाईफ को. यशवंत ने मुझे डिवशेयर के बारे में बताया था.... ट्राई करूंगा कभी. बहुत कुछ है सुनाने को, माउथ ओरगन और गिटार पर. 
पुरानी जींस और गिटार....
एक और बात जिसके बारे मैं जितना सोचूं उतनी ही हंसी आती है. आप सुलझाईये तो सही ज़रा गुत्थी को. जब कोई मर जाता है तो उसके नाम के आगे अंग्रेज़ी में 'लेट' लिख दिया जाता है. माँ सा, अगर ज़िन्दगी एक सफ़र है जिसका आखिरी जंक्शन मौत है..... तो जो वहां पहुँच गया वो तो 'राईट टाईम' हुआ ना?!!! 'लेट' तो वो हैं जो जिए जा रहे हैं! वहीं किसी के गुज़र जाने के बाद, हिंदी में वह 'स्वर्गीय' हो जाता है. फिर चाहे वो कोई भी हो. किसी की गाड़ी नरक के 'प्लेटफार्म' पर क्यूँ नहीं आती? मुझे भीड़-भाड़ पसंद नहीं है.... आई विल गो टु नरक. 
अब साल से कुछ ज़्यादा हो गया है पंजाब में. पंजाबी में तुकबंदी तो ठेलनी ही पड़ेगी......
ਮੇਰੀ ਪਲਕ ਦੇ ਥੱਲੇ, ਇਕ ਹੰਜੂ ਹੈ ਮਗਰ!
ਤੇਰੇ ਤੋਂ ਐ ਬੀਬਾ, ਕੋਈ ਸ਼ਿਕਵਾ ਨਹੀਂ ਹੈ!
ਨਸੀਬਾਂ ਦੇ ਵਿਚ ਜੋ, ਲਿਖਿਆ ਨਾ ਰੱਬ ਨੇ!
ਕਦੇ ਵੀ ਕਿਸੇ ਨੂੰ, ਮਿਲਦਾ ਨਹੀਂ ਹੈ!
ਹੋਰ ਵੀ ਲੋਕੀਂ, ਛਡ ਕੇ ਗਏ ਨੇ!
ਆਪਾਂ ਨੂੰ ਇੱਦਾ ਦੀ, ਆਦਤ ਰਹੀ ਹੈ!
ਮਜਬੂਰ ਹੈ ਤੂੰ ਵੀ, ਮਜਬੂਰ ਹਾਂ ਮੈਂ ਵੀ!
ਤੂੰ ਦੁਨੀਆਂ ਦੇ ਲਈ ਹੈ, ਅਸੀਂ ਦਿਲ ਦੇ ਲਈ ਹੈ! 
जो मेरे हिसाब से मैंने लिखा है: 
मेरी पलक के नीचे एक आंसू है मगर! 
ए डियर तुझसे कोई शिकवा नहीं है!
रब ने जो नसीब में ना लिखा हो!
वो कभी भी किसी को मिलता नहीं है! 
और भी लोग मुझे छोड़ कर गए हैं!
मुझे इस तरह की आदत रही है! 
मजबूर है तू भी, मजबूर हैं हम भी!
तू दुनिया के लिए है, हम दिल के लिए हैं!

* सर्दी के सेलिब्रेशन में जो कमी रह गयी, उसके लिए पंजाब के बुज़ुर्ग फर्मा कर गए हैं:
ਲਗ ਗਿਆ ਮਹੀਨਾ ਪੋਹ!
ਬਚਣਗੇ ਉਹ , ਜੇੜੇ ਸੋਣਗੇ ਦੋ! 
माफ़ कीजिये, इसका तर्जुमा मैं नहीं कर पाऊंगा. ये जोक पंजाबी जानने वालों के लिए. हिंदी भाषियों से तो यही कहूँगा बस.... मैं और मेरी रजाई अक्सर ये बातें करते हैं........
हा हा हा!!!
(पंजाबी में वर्तनी शुद्धिकरण, आई मीन स्पेलिंग करेक्शन का श्रेय, आई मीन क्रेडिट जाता है मेरी ब्रांच के आर्म्ड गार्ड फौजी सरदार अमरजीत सिंह को.) 

34 टिप्‍पणियां:

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

अच्छी बाथ प्लानिंग.... :) गिटार के लिए बधाई....

संजय @ मो सम कौन ? ने कहा…

नाम के साथ बाऊजी लिखकर मेरी संभावित कहानियों पर मिट्टी डाल देते हो, ’आते आते मेरा नाम सा रह जाता है कहीं’:)) पर कोई गल्ल नईं, छॊटा वीर है मेरा।
न नहाने के बहानों पर, गिटार फ़िर से शुरू करने पर संजय बाऊ का पूरा समर्थन। नये-पुराने मायने-आयाम खुल कर स्थापित करो, इतना भरोसा है कि जो भी करोगे अच्छा करोगे। हम गिटार और आर्गन सुनने को तैयार बैठे हैं।
अब आ जा प्यारे अंडर करंट लहरों पर। क्या हुआ है, आशीष? इस उम्र में फ़ाईनल डेस्टिनेशन जैसी बातें शोभा नहीं देतीं। वैसे भीड़भाड़ अपने को भी नहीं पसंद, कहीं ऐसा न हो कि अपने जैसों की ही भीड़ इकट्ठी हो जाये? लेकिन वो भीड़ नहीं होगी। ऐसी तुकबंदियां दिल छू जाती हैं, लेकिन मैं वाह-वाह नहीं कर पाता(लिखने वाले पर पता नहीं क्या हो गुजरा है और मैं वाह-वाह कहूँ, जमता नहीं)। इतना ही कहूँगा, शो मस्ट गो-ऑन।
ਪਂਜਾਬੀ ਵਿਚ ਹਾ ਹਾ ਹਾ, ਐਹ ਵਾਲੀ ਠਂਡ ਤਂ ਲਂਘ ਗਈ, ਅਗਲੀ ਵਾਰ ਤੋਂ ਪਹਲਾਂ ਹੀ ਠਂਡ ਤੋਂ ਬਚਨ ਦਾ ਜੁਗਾਡ ਕਰ ਲੈ|
यार, ये तो हमारे दोनों के गार्ड साहब की कुंडलियां भी मिलती हैं:)) किला रायपुर का प्रोग्राम बना रखा है इस बार मैंने और गार्ड साहब ने, देखो जा पाते हैं कि नहीं। हाय हाय ये मजबूरी, दो टकेयां की नौकरी ते लाखों दा..।
सुबह सुबह कुछ बहका बहका सा नहीं लग रहा मैं? हा हा हा

शिवकुमार ( शिवा) ने कहा…

अच्छी पोस्ट

सुरेन्द्र "मुल्हिद" ने कहा…

yaar waakai mein bada mazaa aata hai aapki compositions padh ke...subah subah ki shuruaat achhi ho jaati hai!!!
sahi mein LATE to wo hain jo jiye jaa rahey hain!!

Bhushan ने कहा…

हैलो हमारे ढपोरशंखी. आप हमारे मोरपंखी (कन्हैया) भी हो. सर्दियों की अच्छी प्लानिंग की. पंजाबी में कहावत है-
पाला- बच्चों का साला
जवानों का भाई
और बूढ़ों का जँवाई
सो तुम पाले के भाई निकले जो आधा महीना नहाए. सर्दियों में रही आपकी starred कमी का अनुवाद मैं आपके सभी पाठकों के लिए किए देता हूँ-
पौष माह लगा
जो जोड़ा बना कर सोया
वही सर्दी से बचा
इतनी सी बात कहने में इतना शर्मा क्यों रहे थे लला. अब शरीर छब्बीस का हो गया न? लेजरों से बाहर निकल कर अपना कोई ज्वाइंट अकाऊँट खोल लो प्यारे. ईश भला करेंगे (किसी की गारंटी ले लेना).

सुलभ § Sulabh ने कहा…

YE HUI NA BAAT. APNA BHEE MOOD FRESH !!

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

नहाने में इतना दिमाग लगा लिये होते हम लोग तो सारे खेतों को पानी मिल गया होता।

इमरान अंसारी ने कहा…

वदिया है आशीष जी......सर्दी में ये प्लानिंग तो सभी की होती है......गिटार बढ़िया है कोई अच्छी सी धुन भी सुना देते :-)

पंजाबी तुकबंदी भी वदिया बन पड़ी हैगी जी.......और रही बात स्वर्ग और नरक की तो चचा ग़ालिब का ये शेर आपकी नज़र है.....

"हमको मालूम है जन्नत की हकीक़त लेकिन,
दिल को खुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख्याल अच्छा है,"

G Vishwanath ने कहा…

यह सरासर नाइंसाफ़ी है जी।
आप को किसने यह हक दिया कि आप happily unmarried रहें?
हमने ने कौनसा अपराध किया था, जिसके के लिए ३६ साल पहले हमारी शादी कराई गई और हमें happily married के गुट में धकेला गया था?
हम शिकायत करेंगे।
आपके मम्मी डैडी से कहकर जल्द ही एक काबिल लडकी को तुम्हारे पल्ले बाँध देंगे।
कुछ दिन उसकी दी हुई ट्रेनिंग के बाद, तुम सुधर जाओंगे, और दिन में दो बार नहाने का प्रोग्राम बन जाएगा, नहीं तो खाना पीना बन्द।
गिटार और मौथ ऑर्गन के बजाय आप second fiddle play करना सीखेंगे।
तारीख दूर नहीं है। हमें invitation भेजना न भूलिएगा।

शुभकामनाएं
जी विश्वनाथ

यशवन्त माथुर ने कहा…

क्या बात है सर! महीने में एक बार ब्लॉग पर आपके दर्शन होते हैं और उसमे भावुकता और हास्य का ऐसा मिक्सचर मिलाते हैं की पढने वाला एक बार नहीं बार बार आकर पढने को मजबूर हो जाता है.
जो साईट मैंने आपको बताई थी बहुत ही बढ़िया साईट है मेरे ब्लॉग का बैकग्राउंड ट्रैक भी उसी पर होस्ट है.
आपको सुनने की बेताबी को बयाँ नहीं कर सकता जल्दी ही रिकॉर्ड करके यहाँ भी लगाइए.

सादर
आपका छोटा भाई

सुशील बाकलीवाल ने कहा…

केलक्युलेटिवली नहाने का फार्मूला अच्छा रहा.

वाणी गीत ने कहा…

और भी लोग छोड़कर गए हैं , कोई नयी बात नहीं है ...
शानदार !
छब्बीस में बच्चा होना कोई बड़ी बात नहीं है !

दिगम्बर नासवा ने कहा…

मजबूर है तू भी, मजबूर हैं हम भी!
तू दुनिया के लिए है, हम दिल के लिए हैं ...

Ashish ji ... aapke nahaane ki baat se main bhi sahmat hun .. aur is sher mein kahi baat se bhi ... apni apni majboori hai ...

shekhar suman ने कहा…

बहुत खूब भाई साहब...वैसे आपका शरीर २६ साल का ही है, इसपर मुझे शक है..:P
अरे गुस्सयिये नहीं हम तो मजाक कर रहे थे....
खैर आपके गिटार और माउथ ओरगन का इंतज़ार रहेगा, ठीक वैसे ही जैसे ११ मुल्कों की पुलिस don का इंतज़ार रही है...:)
वैसे सबके जन्मदिन पर नहाने वाली बात पसंद आई लेकिन अगर किसी दिन दो-दो जन्मदिन निकल आये तो क्या आप दो बार नहाते हैं...:D

रवि धवन ने कहा…

ਲਗ ਗਿਆ ਮਹੀਨਾ ਪੋਹ!
ਬਚਣਗੇ ਉਹ , ਜੇੜੇ ਸੋਣਗੇ ਦੋ!
खतरनाक लिख दिया है।
अच्छा किया जो तर्जुमा नहीं किया।
हमेशा की तरह बढिय़ा पोस्ट। पढ़कर मजा आ जाता है।

Unknown ने कहा…

ashish ji,

post ke liye dhanyawad,

waise ye bachelorhood kyon, kahin daroo aur machhi khane ka plan to nahi bana rahe... (ladki walon bilkul dhyan mat dena :) ),

mujhe punjabi nahi ati isiliye dusri tukbandi nahi padh paya...

waise Sanjay ji se sehmat hoon is umar mein final destination ke bare mein koi charcha nahi.

aur haan late ka matlab pichhla bhi hota hai, isiliye wo late likha jata hai ki wo peechhe gaye, ab kisi aur ka number hai, kal hamara bhi ayega.

HA HA HA...

thodi si ye beemari uphar mein dene ka shukriya
:)

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " ने कहा…

wah kya kahna !
badi masti me likhi hai post.

वन्दना महतो ! ने कहा…

'लेट', 'स्वर्गीय' व नरक के प्लेटफार्म के बारे में इस तरह से सोचवाने के लिए धन्यवाद..... पोस्ट तो हमेशा की तरह बहुत अच्छी है!

monali ने कहा…

Ae lo abhi tak padh k jhel rahe the aur ab aap sunayenge bhi? chaliye iska bhi intzaar rahega... date fix ho jaye to suchit kijiyega :)

Aur aapko kisne kaha k narak me kam bheed hoti h??? mere frnds ki poori paltan (including ME) wahin rehne ki taiyaari me h to aapko bheed bhi milegi aur shor bhi :P

Aur jaan kar khushi huyi k aap paani bachane me apna amulya yogdaan de rahe hain :D

इंदु पुरी गोस्वामी ने कहा…

बाबा
प्यार

उठते ही तुम्हारी पोस्ट पढ़ी.आज नहाना केंसिल .ब्लॉग पर व्यूज़ देना चाहती थी किन्तु हिंदी में टाइप नही हो रहा.कंट्रोल+जी दबा कर भी देख लिया इसलिए सोचा,मेल ही कर दूँ.गिटार ले लिया ,अच्छा किया.मैंने आज तक अपने शौक,होबिज़ को तिलांजलि नही दी.समय निकाल ही लेती हूँ.गाती भी हूँ और स्टेज पर साल में एक बार प्ले भी देती हूँ.ज़िन्दगी अपनी रफ्तार से चलती रहती है.इन चौबीस घंटों में ही हमे सब कुछ करना है.इसलिए करो.देश की भावी पीढ़ी के लिए पानी बचा कर तुम देश की सेवा कर रहे हो.सच्चे देश भक्त हो.आज से अपुन भी तुम्हारे साथ.
हा हा हा
अंतिम स्टेशन वही है निसंदेह.पर जल्दी नही जाऊंगी चाहती हूँ पचास साल और तो रहूँ ही यहाँ बाद में सबका इंतजार करूंगी वहां.वहां जाने के पच्चीस साल बाद ही तुम्हे बुलवाऊँगी.26+50+25=101 साल के होओगे पूरे. और अपुन को भी वहीं रहना है जहाँ ज्यादा भीड़ भाड़ न हो.एकांत में बैठेंगे और गिटार सुनेंगे माऊथ ओरगन भी.मैं गाने सुनाऊंगी.भाग कर जगह मत बदल देना कि-'प्रभुजी!इसे नर्क में ही रहने दो,मेरे लिए स्वर्ग में एक सीट बुक कर लो.'
हा हा हा
जाने क्यों लगा कुछ और भी लिखते ....बहुत कम लिखा है.
तेरी आँखों में जो एक बूँद आंसू की थी
देख कहीं वो मैं तो नही.
रहती हर वक्त साथ जिसे प्यार करती हूँ
जब चाहे देख ले मुझको
मै हूँ तेरे करीब यहीं कहीं
तेरी गर्ल फ्रेंड जो हूँ
है न?
माँ सा

इंदु पुरी गोस्वामी ने कहा…

बाबा
प्यार

उठते ही तुम्हारी पोस्ट पढ़ी.आज नहाना केंसिल .ब्लॉग पर व्यूज़ देना चाहती थी किन्तु हिंदी में टाइप नही हो रहा.कंट्रोल+जी दबा कर भी देख लिया इसलिए सोचा,मेल ही कर दूँ.गिटार ले लिया ,अच्छा किया.मैंने आज तक अपने शौक,होबिज़ को तिलांजलि नही दी.समय निकाल ही लेती हूँ.गाती भी हूँ और स्टेज पर साल में एक बार प्ले भी देती हूँ.ज़िन्दगी अपनी रफ्तार से चलती रहती है.इन चौबीस घंटों में ही हमे सब कुछ करना है.इसलिए करो.देश की भावी पीढ़ी के लिए पानी बचा कर तुम देश की सेवा कर रहे हो.सच्चे देश भक्त हो.आज से अपुन भी तुम्हारे साथ.
हा हा हा
अंतिम स्टेशन वही है निसंदेह.पर जल्दी नही जाऊंगी चाहती हूँ पचास साल और तो रहूँ ही यहाँ बाद में सबका इंतजार करूंगी वहां.वहां जाने के पच्चीस साल बाद ही तुम्हे बुलवाऊँगी.26+50+25=101 साल के होओगे पूरे. और अपुन को भी वहीं रहना है जहाँ ज्यादा भीड़ भाड़ न हो.एकांत में बैठेंगे और गिटार सुनेंगे माऊथ ओरगन भी.मैं गाने सुनाऊंगी.भाग कर जगह मत बदल देना कि-'प्रभुजी!इसे नर्क में ही रहने दो,मेरे लिए स्वर्ग में एक सीट बुक कर लो.'
हा हा हा
जाने क्यों लगा कुछ और भी लिखते ....बहुत कम लिखा है.
तेरी आँखों में जो एक बूँद आंसू की थी
देख कहीं वो मैं तो नही.
रहती हर वक्त साथ जिसे प्यार करती हूँ
जब चाहे देख ले मुझको
मै हूँ तेरे करीब यहीं कहीं
तेरी गर्ल फ्रेंड जो हूँ
है न?
माँ सा

संजय भास्कर ने कहा…

@ यशवंत भाई ने सही कहा
क्या बात है सर! महीने में एक बार ब्लॉग पर आपके दर्शन होते हैं और उसमे भावुकता और हास्य का ऐसा मिक्सचर मिलाते
.......................

पर मै कहता हूँ नौकरी इज नौकरी

ali ने कहा…

प्रिय आशीष जी ,
जिस्म की उम्र छब्बीस हो तो फिर साल में छब्बीस नहाने तो कम से कम बनते ही हैं और अगर संडे के संडे का ख्याल करें तो कुल बावन :)

अंगरेजी वाले लेट(ने)के मुक़ाबिल ज्यादातर लोग हिन्दी वाला लेट(ना) ज्यादा पसंद करते हैं क्योंकि इसमें मुकम्मिल सुकून और काफी ज्यादा रोमांस , दोनों ही की गुंजायश बनती है :)

और पंजाबी बुजुर्गों का सर्दी वाला इशारा भी तो इसी सिम्त है जनाब :)

Shilpa ने कहा…

ਸੋਹਣੀ ਪੰਜਾਬੀ ਕਵਿਤਾ ਲਿਖ ਲੈਂਦੇ ਹੋ ਤੁਸੀਂ, ਵਧੇਰੇ ਪ੍ਰਸ਼ੰਸਾਯੋਗ ਇਸ ਕਰਕੇ ਵੀ ਹੈ ਕੇ ਤੁਸੀਂ ਪੰਜਾਬੀ ਨਹੀ ਹੋ | ਵੈਸੇ ਹੁਣ ਤਾਂ ਪੰਜਾਬ ਵਿਚ ਵੀ ਮੌਸਮ ਫ਼ਰਕ ਪੈ ਗਿਆ ਹੈ ਸੋ ਹੁਣ ਤੁਸੀਂ ਨਹਾ ਵੀ ਸਕਦੇ ਹੋ | ਅਤੇ ਪੋਸਟ ਵੀ ਬਹੁਤ ਚੰਗੀ ਲਿਖੀ ਹੈ |
.
.
.
ਸ਼ਿਲਪਾ

Parul ने कहा…

ye naye naye nuskhe jindagi ke :)

Manoj K ने कहा…

हाँजी आखिरी स्टेशन तो वही है.

गिटार, पुरानी जींस और एक मोटरसाइकिल. हमारी बहुत तमन्ना है कि ५००-७०० कि.मी मोटरसाइकिल से यात्रा की जाए, अच्छे साथियों की तलाश है बस. देखते हैं कब इत्तेफाक बनता है.

सर्दी इस बार बहुत थी,आपने अच्छा फनडा निकाला है, कम नहाने का...

राजेश उत्‍साही ने कहा…

सही है पापे। अनमैरिड हो इसलिए नहाने और नहीं नहाने को लेकर इतनी माथापच्‍ची कर लेते हो। जिस दिन एक से दो हो जाओगे,दिन में एक बार नहीं दो-दो बार नहाने के लिए कूदते फिरोगे।
*

और बात तो सही है। अपन तो वसीयत में लिख रहे हैं कि हमारे मरने पर नाम के हिन्‍दी में स्‍वर्गीय के जगह नरकीय लिखा जाए। और अंग्रेजी में भी लेट की जगह राईट टाइम पर लिखा जाए।

हरकीरत ' हीर' ने कहा…

:)

Dinesh Rohilla ने कहा…

जो भी कुछ लिखते हो बहुत ही मज़ेदार लिखते हो ...
काफी दिन बाद आपके ब्लॉग पर आया हुईं काफी पोस्टें मिस हो गयी है
--
..

Avinash Chandra ने कहा…

बात तो है आशीष भाई, बात तो है। और ये आपकी तारीफ़ है, क्लास में दूरी वाली बात न शुरू करियेगा अब :)
एक नहीं नहाने वाले हैं हमारे यहाँ भी... अच्छा है।
तुकबंदी पढ़ ली, सोच रहा हूँ कि कब-कैसे लिखी गई होगी।

और हाँ, माउथ ऑर्गन और गिटार का जब नंबर आए तो महीने में एक-आध (एक से अधिक) बार हो :)

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार ने कहा…

प्रिय बंधुवर आशीष जी
यूं ही हंसते हंसाते रहो !

शुरू से आख़िर तक मस्त लिखते हो …
पंजाबी न पढ़ पाने का मलाल रहा बस …

बसंत पंचमी सहित बसंत ॠतु की हार्दिक बधाई और मंगलकामनाएं !
- राजेन्द्र स्वर्णकार

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार ने कहा…

प्रिय बंधुवर आशीष जी
यूं ही हंसते हंसाते रहो !

शुरू से आख़िर तक मस्त लिखते हो …
पंजाबी न पढ़ पाने का मलाल रहा बस …

बसंत पंचमी सहित बसंत ॠतु की हार्दिक बधाई और मंगलकामनाएं !
- राजेन्द्र स्वर्णकार

Mrs. Asha Joglekar ने कहा…

पानी की किल्लत है क्या ? या बूद बूद बचाओ अभियान है । वैसे कविता अच्छी लगी । कहीं पानी को ही तो नही समर्पित ।

Sanjana ने कहा…

hahaha...

Realistically amusing :)

nice work..

Regards!