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मंगलवार, 1 मार्च 2011

लम्हा!!!

अगर नंबर ऑफ़ कमेंट्स किसी ब्लॉग की लोकप्रियता का सूचकांक है तो बॉस, अपने ब्लॉग में तो फुल बियर रन चल रहा है, शेयर के भाव गिर रहे हैं, बिकवाली छाई है, कुल मिला के मार्केट डाऊन है!!! दर-असल, मैं ही आजकल 'व्यस्तं-मस्तं च' मोड में हूँ, और चाहकर भी आप लोगों को पढ़ नहीं पा रहा हूँ. ये आज की पोस्ट भी टाईफाईड के सौजन्य से, नहीं तो बैंकर बन के ज़िंदगी........
बस के कंडक्टर जैसी हो गयी हैं यारों,
सफ़र भी रोज़ करना है और जाना भी कहीं नहीं! 
(एक बैंक में कार्यरत महिला मित्र ने एस एम एस द्वारा भेजा)
एक सहेली से शायद परसों ही कहा था: ज़िंदगी में मैं मजबूर होने से शुरू से नफरत करता था, अब एक और चीज़ से नफरत हो गयी है. उसने पूछा: किससे? मैंने कहा, अकेलेपन से!!! तबियत खराब है न, शायद इसलिए कहा हो!!! आज आपसे कुछ लम्हे शेयर कर रहा हूँ, कुछ नए हैं, कुछ पुराने. 
लम्हा-लम्हा बनता जीवन,
इस जीवन में कुछ लम्हे हैं!
इन लम्हों में से कुछ लम्हे,
तेरे मेरे संग गुज़रे हैं!
इन लम्हों को तू हर लम्हा,
अपने संग संजो कर रखना!
जाने जीवन के किस लम्हे में,
तुझको मेरी याद आ जाए!
जिस लम्हे में मेरी याद आए,
  उस लम्हे में ग़म मत करना!
मुस्का देना उस लम्हे में,
आँखों को तू नम मत करना!

रेत का डमरू: गूगल बाबा
और अगर....

हो सके तो तेरे लम्हे,
मेरे लम्हों में यूँ मिला दे!
आने वाले हर लम्हे को,
मेरे लम्हों के संग बिता दे!
हर लम्हे को रोशन कर दे,
हर लम्हा खुशहाल बना दे!
हर लम्हा मैं तुझपे हारूँ,
  हर लम्हा तू मुझे जिता दे!


मैं भी इस लम्हे में वादा,
करता हूँ तुझसे ए हमदम!
हर लम्हा तुझे देखा करूंगा,
हर लम्हा तुझे सोचा करूंगा!
हर लम्हा तेरे संग रहूँगा,
हर लम्हा तेरा रंग रहूँगा!
इस लम्हे में कर ले यकीं तू,
मेरे अल्फाज़ों पर महरम!
हर लम्हा तुझे चाहूंगा मैं,
हर लम्हा मैं वफ़ा करूंगा!

(और अगर इतना सब पॉसिबल न भी हो, तो भी कोई टेंशन नहीं. जस्ट बी ए बण्डल ऑफ़ जॉय, फोरेवर! मे होप, हैल्थ एंड हैप्पीनेस बी योर फ्रेंड्स फॉर लाईफ!!! मैं तो खैर रहूँगा ही! या शायद..... हु नोज़!!!)
ब्लोगोस्फीयर में पहेलियों का बड़ा फैशन है आजकल. सोचता हूँ मैं भी बूझ ही लूं. उपर लिखी तुकबंदी में 'लम्हा' और उसके वेरिएन्ट्स कितनी बार यूज़ हुए हैं? कोई प्राईज़ नहीं, कोई विनर नहीं. क्यूँ? क्यूंकि, ये डायलोग तो सुना ही होगा: अहम नहीं के ज़िंदगी में कितने लम्हे हैं, अहम ये है के लम्हों में कितनी ज़िन्दगी है!
आप कह सकते हैं के इसमें कौन सी नयी बात है, लेकिन मैं अपनी ज़िन्दगी में रिग्रेट्स नहीं रखना चाहता, इसलिए फिर से कह रहा हूँ: आई लव यू!!! 
  हा हा हा!!!

53 टिप्‍पणियां:

monali ने कहा…

एक ग़मज़दा कविता को खुशी की ज़िल्द में रखकर...
फिर से ग़म को सहेज रहा है कोई शायर ये कह कर..
क़ि याद तेरी आती नहीं मगर तू दिल-ओ-दिमाग से कहीं जाती भी तो नहीं...

आशीष जी,
आप तो हर बार कहकहा लगा के निकल जाते हो...
मुझे तो ये सब पढ कर हंसी आती भी नहीं...

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

अहम नहीं के ज़िंदगी में कितने लम्हे हैं, अहम ये है के लम्हों में कितनी ज़िन्दगी है!
हमने तो पोस्ट में सबसे अच्छी बात पकड़ ली है..... धन्यवाद.....
अब क्विज़ में हिस्सा नहीं ले पायेंगें ....

संजय @ मो सम कौन ? ने कहा…

ओये काके,
व्हाट इज़ दिस?
"मैं तो खैर रहूँगा ही! या शायद..... हु नोज़!!!)"
तेरी क्लास लेनी पड़ेगी।

गैट वैल सून, फ़िर देखते हैं तेरे को।

सुरेन्द्र "मुल्हिद" ने कहा…

ashish bhai...
its always a please to read you...!

ali ने कहा…

बस कंडक्टर वाले शेर को कुछ यूं पढ़ा... 'सफर' बोले तो कष्ट और 'जाना' बोले तो प्रियतमा ! अब जनाब के दुश्मनों की तबियत नासाज़ है ! खुदा खैर करे !

लम्हों और उसके वैरिएंट्स की गिनती का ख्याल क्यों किया जाए जब तक कि आप ...
तू , तेरे , तेरा , तुझे , तुझसे , तुझपे , तुझको , के बारे में सबको साफ़ साफ़ ना बतायें :)

Bhushan ने कहा…

टायफायड में शरीर के अंग अलग-अलग महसूस होते हैं. लगता है डॉ ने गलत डायग्नोज़ किया है. इस पोस्ट में तो ज़िंदगी के सभी अंग सही-सलामत और ज़ुड़े हुए और एक दूसरे के साथ प्रेम से सटे हुए नज़र आ रहे हैं. तुम्हारे अकेलेपन पर तरस नहीं आता. टायफायड होने पर घर को पत्र नहीं लिखा कि 26 का हो गया हूँ आकर देख लें कि कोई मेरी सेवा कर रहा/रही है बल्कि तुरत ब्लॉग पर लौटे. ब्लॉग पर कौन है भाई? 'अहम नहीं कि ज़िंदगी में कितने लम्हे हैं, अहम ये है कि लम्हों में कितनी ज़िन्दगी है'- ये क्या हाल बना रखा है कुछ लेते क्यों नहीं. फिलहाल तुम्हारे अकेलेपन को निहार रहा हूँ.

शिवकुमार ( शिवा) ने कहा…

सुंदर कविता .. बाधाई

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

लम्हों में कितनी जिन्दगी कैद हैं, उन्हे मक्त कर दे।

पी.एस .भाकुनी ने कहा…

phle bhi is blog se hokr gujra hun,wastav main dheer-gambheer blogon se ukta gaye pathkon ke liye ek achhhi jagh ho sakti hai aapka blog....
shubhkaamnayen aapko.

इंदु पुरी गोस्वामी ने कहा…

अब मैं ये कहूँ कि इतने दिनों से तुम्हे नही देख दिमाग में बुरे बुरे ख़याल आ रहे थे तो यकीन मानोगे?
तुम्हे टायफाइड हो गया था.अब कैसे हो?
जिंदगी के प्रति तुम्हारा आशावादी दृष्टिकोण मुझे हमेशा अच्छा लगा है.मैं ''रोऊं'लोगो के पास बैठना भी पसंद नही करती .तुम्हारी तो दोस्त ही इसलिए बनी कि जब भी निराशा मुझे घेरे तुम झट से आवाज लगा दो.
अब ये तो नज्म बन गई है भई.लम्हे और हर लम्हे की गहराई में खूब डूबे और इसका अहसास हमे भी करा दिया.
बाबु! शादी कर लो.यूँ उम्र ज्यादा नही है पर अकेले हो ना ऐसे में.......
और अच्छा जीवन साथी मिल जाए तो जिंदगी बडी खूबसूरत है और ये रिश्ता भी किसी के लिए जीना सीख जाते हैं दोनों.
आर्टिकल अच्छा लगा.
प्यार

Mithilesh dubey ने कहा…

बहुत ही सुन्दर कविता . बधाई

क्या सच में तुम हो???---मिथिलेश

यशवन्त माथुर ने कहा…

खुश रहना तो कोई आप से सीखे.आपकी तबियत अभी भी ठीक नहीं है ऐसा लग रहा है .

अपना ख्याल रखिये 'व्यस्तं-मस्तं च' मोड से निकल कर 'मस्तं मस्तं च' मोड में आ जाइये. हां आप कहेंगे बेटा सिर्फ तेरे लिए कहना संभव है कर और झेल तो मैं ही रहा हूँ.सही बात भी है .

महीने में एक बार लिखते हैं लेकिन ऐसा कि पढ़ने वाले को पूरे महीने की डोज़ मिल जाती है.और मेरी तरह शायद हर कोई आपके ब्लॉग पर 5 से ज्यादा बार तो आता ही होगा.टिप्पणी लिखने के बाद भी.

बस आप अपना ख्याल रखिये.

(कुछ ज्यादा बोल गया न आज ..)

--यशवन्त

Atul Shrivastava ने कहा…

''मैं भी इस लम्हे में वादा,
करता हूँ तुझसे ए हमदम!
हर लम्हा तुझे देखा करूंगा,
हर लम्हा तुझे सोचा करूंगा।''

अच्‍छी रचना। अच्‍छे भाव।

Deepak Saini ने कहा…

Get well soon
बिना प्राईज की पहेली का कौन जवाब देता है
लेकिन आप अपने ही है इसलिए बता देता हूँ, 27 बार
प्यार तो तुम्हे सब करते ही है इसमे कोई कन्फ्यूजन मत रखो
शुभकामनाये

Sonal Rastogi ने कहा…

जब हेल्थ गड़बड़ हो तो ज्यादा एक्सपेरिमेंट नहीं करते दिमाग और दिल के साथ ...बेहतरीन लम्हे अभी बाकी है गेट वेल सून :-)

Kulwant Happy ने कहा…

बेहतर एक्‍सपेरिमेंट

Vijai Mathur ने कहा…

धन्यवाद आशीष जी आपके सद्विचारों के लिए.कविता अच्छी है.
आपके शीघ्र स्वास्थ्य -लाभ की कामना करते हैं.

Geet Jaggi ने कहा…

Aasish ji har baar apki post me khushi hi hoti hai but is baar kuch gham bajar aa rahe hai.... kya baat hai everything is ok na????

Kailash C Sharma ने कहा…

अहम नहीं के ज़िंदगी में कितने लम्हे हैं, अहम ये है के लम्हों में कितनी ज़िन्दगी है!...

बहुत सुन्दर अह्सासपूर्ण प्रस्तुति..

दिगम्बर नासवा ने कहा…

हो सके तो तेरे लम्हे,
मेरे लम्हों में यूँ मिला दे!
आने वाले हर लम्हे को,
मेरे लम्हों के संग बिता दे!

Vaah ...Ashish ji ... aapne lamhon ki paheli hi likh di hai ... par jawaab bhi saath hi likha hai ...
Ek baat ko pakka maane ... comments blog ki lokpriyta ka soochak kabhi bhi nahi hai ...

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " ने कहा…

आशीष जी ,

क्या मस्ती में लिखते हो भाई ! वास्तव में मज़ा आ जाता है आपके ब्लाग पर आकर |



'इन लम्हों को तू हर लम्हा

अपने संग संजोकर रखना

जाने जीवन के किस लम्हे में

तुझको मेरी याद आ जाए '

बहुत सुन्दर ....

क्षितिजा .... ने कहा…

आपकी ये पोस्ट पढ़ कर मुझे एक शेर याद आये ... अर्ज़ किया है ...

रोते रोते मेरे हंसने पर ताजुब न करो
हैं वो ही बात मगर दूसरे अंदाज़ में .... :) :)

इमरान अंसारी ने कहा…

आशीष जी,

आपके अपने अंदाज़ में शानदार पोस्ट है......लम्हे बहुत पसंद आये.....खुदा करे आपकी जिंदगी में खुशियों के लम्हे ज्यादा मात्रा में हों......आमीन

mridula pradhan ने कहा…

जिस लम्हे में मेरी याद आए,
उस लम्हे में ग़म मत करना!
मुस्का देना उस लम्हे में,
आँखों को तू नम मत करना!
wah.....bas...... wah.....

वन्दना ने कहा…

वाह बहुत ही सुन्दर ख्याल लम्हो मे समेटा है।

vijaymaudgill ने कहा…

lamho main zindgi ka safar aur zindgi main lamho ka safar accha laga

shukriya

daanish ने कहा…

ज़िंदगी के लम्हे
लम्हों की ज़िंदगी
सभी लम्हे
चाहा कि लम्हे भर में पढ़ लूं
लेकिन लम्हे भर का ख़याल
कुछ और लम्हों को साथ लेता गया
बस, लम्हे भर में ही.... !!

ज़िंदगी का भरपूर फलसफा
हर लम्हे में समाया हुआ
ख़ूबसूरती से ...

अपनी सेहत का ख़याल रखियेगा
हर लम्हा ही ....

निर्मला कपिला ने कहा…

मेरे लम्हों के संग बिता दे!
हर लम्हे को रोशन कर दे,
हर लम्हा खुशहाल बना दे!
हर लम्हा मैं तुझपे हारूँ,
हर लम्हा तू मुझे जिता दे!

अपनी तो शुभकामनायें और आशीश ले लो हर लम्हा खुशहाल रहे।

महफूज़ अली ने कहा…

भई अकेलेपन से तो हम भी बहुत परेशां हैं... कोई मिलती ही नहीं... जो भी मिलती है छोड़ कर भाग जाती है.... कहती कि ज़रूरत से ज्यादा स्मार्ट और हैंडसम हो.... रचना तो गजब की लिखी है भई.... भई तबियत का ख्याल रखना.... नहीं रखोगे... तो कोई कोई रखने आएगी भी नहीं...

mahendra verma ने कहा…

ये लम्हे सहेजने के लिए हैं। इन्हीं लम्हों के सहारे ज़िंदगी लम्हा-लम्हा आगे बढ़ती है।

शीघ्र स्वास्थ्य लाभ के लिए शुभकामनाएं।

हरकीरत ' हीर' ने कहा…

मैं भी इस लम्हे में वादा,
करता हूँ तुझसे ए हमदम!
हर लम्हा तुझे देखा करूंगा,
हर लम्हा तुझे सोचा करूंगा!
हर लम्हा तेरे संग रहूँगा,
हर लम्हा तेरा रंग रहूँगा!
इस लम्हे में कर ले यकीं तू,
मेरे अल्फाज़ों पर महरम!
हर लम्हा तुझे चाहूंगा मैं,
हर लम्हा मैं वफ़ा करूंगा!

ਬੱਲੇ ......
ਛਡੋ ਜੀ ਰਹਿਣ ਦਿਓ
ਓਹ ਚੁਟਕੁਲਾ ਨਹੀਂ ਸੁਨੀਆ ਤੁਸੀਂ ......
ਵਿਆਹ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ....ਕੁੜੀ ਦੇ ਲੰਬੇ ਵਾਲ ਵੇਖ ...
ਜੀ ਚਾਹੰਦਾ ਹੈ ਸਾਰੀ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਤੇਰੀ ਜੁਲਫਾਂ ਤਲੇ ਗੁਜਾਰ ਦੀਆਂ .....
ਵਿਆਹ ਤੋਂ ਬਾਹਦ .....ਕੁੜੀ ਖਾਣਾ ਲੈ ਕੇ ਆਂਦੀ ਹੈ ਤੇ ....
ਆਹ ਝਾਟੇ ਨੂੰ ਤੇ ਅੱਗ ਲਾ ਲੈ ਪਹਿਲਾਂ ....

ha...ha...ha....

राकेश कौशिक ने कहा…

हो सके तो तेरे लम्हे,
मेरे लम्हों में यूँ मिला दे!
आने वाले हर लम्हे को,
मेरे लम्हों के संग बिता दे!
हर लम्हे को रोशन कर दे,
हर लम्हा खुशहाल बना दे!
हर लम्हा मैं तुझपे हारूँ,
हर लम्हा तू मुझे जिता दे!

हार्दिक शुभकामनाएं

चैतन्य शर्मा ने कहा…

आपको महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनायें....

anoop joshi ने कहा…

Sir,
aapne jaldi me likha hai ye dekh kar laga mano mujhe bhi jaldi me padhna hai.haa ha ha

thanks 4 your wishes sir,

सदा ने कहा…

वा‍ह....बहुत ही खूबसूरती से हर लम्‍हे का जिक्र किया है आपने ...बधाई ।

Patali-The-Village ने कहा…

बहुत ही सुन्दर कविता|
आप को महाशिवरात्री की हार्दिक शुभकामनाएँ|

रचना दीक्षित ने कहा…

आने वाले हर लम्हे को,
मेरे लम्हों के संग बिता दे!
हर लम्हे को रोशन कर दे,
हर लम्हा खुशहाल बना दे!
हर लम्हा मैं तुझपे हारूँ,
हर लम्हा तू मुझे जिता दे!

क्या बात है...

आजकल बैंक में बैक्टीरिया वाइरस बहुत घूम रहें हैं जो हमारे बच्चे को पकड़ लिया. जल्दी तबियत सुधारों. लेकिन इस बहाने अच्छी पोस्ट पढ़ने को मिली. गेट वेल सून.

रवि धवन ने कहा…

hey superb hei yaar
:)

Unknown ने कहा…

ye lo ji, aa gaya bullish trend apke market mein.
Pehle to meri thodi si aj typhoid ke sath court mein behsa behsi hui hai, bol raha tha jaldi chala jayega, use apke shubhchintako ke sath pange nahi lene na isiliye.
Apki post se bus wala sher chura raha hoon, facebook and twitter intezaar kar rahe hain.
Likhte rahiye, khushhal kavitayein kam hi log likh pate hain aur har kavita to khushhali wala drishtikon aur bhi kam de pate hain.
Badhai.

रचना दीक्षित ने कहा…

अपने ही अंदाज़ में फिर एक लाजवाब पोस्ट अच्छी लगी

वाणी गीत ने कहा…

इन लम्हों में जो भी हो ...
ये लम्हे फिलहाल जी लेने दे ...

सुन्दर कविता !

Sunil Kumar ने कहा…

आशीष भाई मैंने तो आपको वेतन की तरह माना है जो पहली तारीख को मिलेगा और महिना भर कम चलेगा , कमेन्ट अगर कम पड़ रहें हैं तो धन्यवाद देना शुरू करदो हा हा हा ....

रेखा श्रीवास्तव ने कहा…

lamhe ko bahut achchhi tarah se darshaya hai. lamhon se hi jindgi banati hai aur tod kar dekhen to lamhe ke siva usamen hota kya hai?

anjana ने कहा…

अहम नहीं के ज़िंदगी में कितने लम्हे हैं, अहम ये है के लम्हों में कितनी ज़िन्दगी है!
wah wah..

रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिरा" ने कहा…

शकुन्तला प्रेस कार्यालय के बाहर लगा एक फ्लेक्स बोर्ड देखे.......http://shakuntalapress.blogspot.com/2011/03/blog-post_14.html क्यों मैं "सिरफिरा" था, "सिरफिरा" हूँ और "सिरफिरा" रहूँगा! देखे.......... http://sach-ka-saamana.blogspot.com/2011/03/blog-post_14.html

आप सभी पाठकों और दोस्तों से हमारी विनम्र अनुरोध के साथ ही इच्छा हैं कि-अगर आपको समय मिले तो कृपया करके मेरे (http://sirfiraa.blogspot.com , http://rksirfiraa.blogspot.com , http://shakuntalapress.blogspot.com , http://mubarakbad.blogspot.com , http://aapkomubarakho.blogspot.com , http://aap-ki-shayari.blogspot.com , http://sachchadost.blogspot.com, http://sach-ka-saamana.blogspot.com , http://corruption-fighters.blogspot.com ) ब्लोगों का भी अवलोकन करें और अपने बहूमूल्य सुझाव व शिकायतें अवश्य भेजकर मेरा मार्गदर्शन करें. आप हमारी या हमारे ब्लोगों की आलोचनात्मक टिप्पणी करके हमारा मार्गदर्शन करें और अपने दोस्तों को भी करने के लिए कहे.हम आपकी आलोचनात्मक टिप्पणी का दिल की गहराईयों से स्वागत करने के साथ ही प्रकाशित करने का आपसे वादा करते हैं # निष्पक्ष, निडर, अपराध विरोधी व आजाद विचारधारा वाला प्रकाशक, मुद्रक, संपादक, स्वतंत्र पत्रकार, कवि व लेखक रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिरा" फ़ोन:9868262751, 9910350461

रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिरा" ने कहा…

दोस्तों! अच्छा मत मानो कल होली है.आप सभी पाठकों/ब्लागरों को रंगों की फुहार, रंगों का त्यौहार ! भाईचारे का प्रतीक होली की शकुन्तला प्रेस ऑफ़ इंडिया प्रकाशन परिवार की ओर से हार्दिक शुभमानाओं के साथ ही बहुत-बहुत बधाई!



आप सभी पाठकों और दोस्तों से हमारी विनम्र अनुरोध के साथ ही इच्छा हैं कि-अगर आपको समय मिले तो कृपया करके मेरे (http://sirfiraa.blogspot.com , http://rksirfiraa.blogspot.com , http://shakuntalapress.blogspot.com , http://mubarakbad.blogspot.com , http://aapkomubarakho.blogspot.com , http://aap-ki-shayari.blogspot.com , http://sachchadost.blogspot.com, http://sach-ka-saamana.blogspot.com , http://corruption-fighters.blogspot.com ) ब्लोगों का भी अवलोकन करें और अपने बहूमूल्य सुझाव व शिकायतें अवश्य भेजकर मेरा मार्गदर्शन करें. आप हमारी या हमारे ब्लोगों की आलोचनात्मक टिप्पणी करके हमारा मार्गदर्शन करें और अपने दोस्तों को भी करने के लिए कहे.हम आपकी आलोचनात्मक टिप्पणी का दिल की गहराईयों से स्वागत करने के साथ ही प्रकाशित करने का आपसे वादा करते हैं

यशवन्त माथुर ने कहा…

आप को सपरिवार होली की हार्दिक शुभ कामनाएं.

सादर

क्षितिजा .... ने कहा…

आपको सपरिवार होली की हार्दिक शुभकामनाएं

BrijmohanShrivastava ने कहा…

होली का त्यौहार आपके सुखद जीवन और सुखी परिवार में और भी रंग विरंगी खुशयां बिखेरे यही कामना

baabusha ने कहा…

aap to bade kamaal hain miyaan ! :)

abhilash ने कहा…

bola tha na....perfect marriage material....add this shayri point to dat... ;)

सारा सच ने कहा…

nice

VIJUY RONJAN ने कहा…

bahut hi sundasr bhav..bilkul straight from heart...

dil ki kalam se likhi ek khoobsoorat si nazm jo sannson si padhi jaaye...