केमिकल लोचे के शिकार.....

पहचान कौन???

मेरी फ़ोटो
मैं कौन हूँ, मैं क्या कहूं? तुझमे भी तो शामिल हूँ मैं! तेरे बिन अधूरा हूँ! तुझसे ही तो कामिल हूँ मैं!

आपको पहले भी यहीं देखा है....!!!

सोमवार, 20 फ़रवरी 2012

द डर्टी पिक्चर!!!

इस पोस्ट का रिलेशन विद्या बालन या उनकी फिल्म से नहीं है. इनफैक्ट, मैंने वो फिल्म देखी ही नहीं! ये मेरी वही चीप और पुरानी टेक्टिक है ध्यान अट्रैक्ट करने वाले टाईटल रखने की! हाँ, पर पोस्ट से टाईटल का रिलेशन है. कैसे? पोस्ट पढ़ जाओ, खुद जान जाओ! 
पिछले कुछ दिनों में डेप्युटेशन पर सिवालखास में था. वहाँ का अफ़सर ब्याह रचाने गया, और कीमत चुकाई बैंक ने और मैंने!!! संजय बाऊ जी/ भूषण बाऊ जी कहेंगे के भैय्ये डेप्युटेशन तो 'ऐश विद कैश' होती है, तो मैंने कैसे कीमत चुकाई? "द डर्टी पिक्चर'' बनाके! हुआ यूं, के एक शाम को ब्रांच के बाहर चबूतरे से भूतल पर उतरते हुए डिसबैलेंस हुआ और अपनी धन्नो के साथ गिर गया ब्रांच के सामने "बड़ी सी नाली" या "छोटे से नाले" में!!! लोगों को बेइंतहा दारु पी के नालियों की सांवली-सलोनी रसमलाई नसीब होती है, हम तो बिना दारु के ही ढिंका-चिका हो गए! इतने गन्दा तो नहीं हुआ के नायक का अनिल कपूर बन पाऊँ, हाँ मगर डर्टी पिक्चर का पोस्टर तो बन ही गया!!!
वहां खड़े लोगों का बहुत हुआ: एंटरटेनमेंट, एंटरटेनमेंट, एंटरटेनमेंट!!! मेरा क्लर्क हंसी दबाते हुए बोला, "अरे सर, आप तो गिर गए!!!" मैंने कहा, "मैं तो पहले से ही गिरा हुआ हूँ!" गिरने पे एक बेहद वाहियात और मामूली तुकबंदिये ने सोचालय में इस घटना से प्रेरित होकर ये सबक लिखा है, नोश फरमाएं:
बुरा नहीं है जग में गिरना,
गिरकर न उठाना, मगर बुरा है!
परवाज़ न टूटी जिसकी कभी भी,
बेशक है वो ज़फर परिंदा!
पर पर काटे किस्मत ने जिसके,
वो बेहतर है गर, फिर भी उड़ा है!!! 
ख़ैर, उस रात जो नहा-धो के लेटे अगली सुबह ही उठे! दफ़्तर जाते समय हनुमान चौक के पास देखा के एक स्कूटर और मोटरसाईकल ज़मीदोज़ पड़े हैं. स्कूटर वाले अंकल, मोटरसाईकल वाले स्कूली बच्चों से उलझ रहे हैं. बच्चे हाथ जोड़ रहे हैं और अंकल रणतुंगा की फुल फीलिंग ले रहे हैं. पब्लिक एज़ युज़ुअल एन्जॉय कर रही है! मैंने धन्नो साईड स्टैंड पे लगाई. एक साईड हीरो और एक जूनियर आर्टिस्ट की मदद से बच्चों की मोटरसाईकल और अंकल का फटीचर स्कूटर उठाया और पूछा किसी को चोट तो नहीं लगी? जब जवाब 'न' में मिला तो पंचम स्वर में बोला, "जाने दो न अंकल! ये तो कुछ भी नहीं, मैं तो कल नाली में गिर गया था!" माहौल टेंस से थोडा लाईट हुआ और पब्लिक जो अब तक सिर्फ शूटिंग देख रही थी हंस पड़ी और कुछेक लोगों ने बीच-बचाव टाईप के डायलोग चिपकाए!
गाँव में काम करने का एक अलग ही आनंद है. पर एक चीज़ अटपटी लगी, कुछ खासे बुज़ुर्ग लोगों का मुझे अंकल कहना! "अंकल!!! अंकल!!! अंकल!!!" बहुत बाद में अहसास हुआ के वो सिर्फ मेरे अच्छे बर्ताव के चलते इज्ज़त बख्श रहे हैं! अंकल मतलब जेंटलमैन!!!  
अंकलजी का लेटेस्ट फोटू. एक प्यारी सी आंटीजी ने खींचा. मगर आप किसी से न कहना!!!

एक दूसरी आंटी अपनी लाईफ की एक अहम इनिंग्स शुरू करने जा रही हैं. मेरी लैब से उनके लिए लाईफ की थीसिस:

ज़िन्दगी के इस सफ़र में,
बन न सके हम हमसफ़र!
किसकी खता, किसको पता?
जुदा हुई मगर अपनी डगर!

फिर भी तेरी आँखों के पानी में,
मौजूद शायद मैं कहीं!
तेरी यादें भी मेरे ज़हन को,
खटखटाती कभी-कभी!

उन सांझे पलों का तुझे,
वास्ता है ऐ रफीक़!
  बेशक मुझे तू भूल जा!
पर आबाद रह और शाद रह!

किसी बात का न मलाल कर!
न अपना हाल बेहाल कर!
ग़ैरों के लिए जिया बहुत!
अब ज़रा खुद से प्यार कर!

घूँट भर महताब का!
स्याह रातों को कर फ़ना!
   हथेलियों पर सजाले धूप की,
गुनगुनाती सी हिना!

कायनात का खुदा का तुझे,
वास्ता है ऐ रफीक!
बेशक मुझे तू भूल जा!
   पर आबाद रह और शाद रह!
     
और आप भी! ज़िंदगी के चुटकुले को सीरियसली नहीं, सिंसियरली लीजिये!!! स्टे हैप्पी! खुश रहो ना यार! 



वैधानिक चेतावनी: 
इस ढपोरशंखी को आप हल्के में लेना छोड़ दीजिये! ये अब सी.ए.आई.आई.बी. हो चुका है. अगर बैंकर हो तो समझ गए होंगे, अगर नहीं तो समझ नहीं पाओगे! 
हाँ इसकी मम्मी ज़रूर खुश होंगी! मे हर सोल रेस्ट इन पीस! 
उफ़! ये इमोशनल अत्याचार! चलो, ख़तम हुआ! कमेन्ट चिपकाओ और चलते बनो!

19 टिप्‍पणियां:

Udan Tashtari ने कहा…

लानत भेजो जो हल्के में ले ले अंकल जी....आपको भला कौन हल्के में लेगा..शामत आई है क्या...

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

सिंसियरली ही लेंगें , बढ़िया रही पोस्ट

संजय @ मो सम कौन ? ने कहा…

काये कू चलते बनें भिड़ू? पार्टी शार्टी कौन लेगा देगा? बहरहाल बधाई स्वीकार करो। जब जे ए आई आई बी बनकर इतरा रहे थे तब भी हमने कहा था कि ’अभी तो ये पहली मंजिल है’ टाईप का कुछ, याद है न? अपनी है मर्द वाली जबान, आज भी वही कह रहे हैं:) मंजिल तय करो, पाओ और नई मंजिल तय करो - पहले से भी ऊंची & keep going on.
गिरते पर कभी नहीं हंसे लेकिन गिरते पर हंसने वालों पर अपने को बहुत हँसी आती है।
अंकल वाला प्वाईंट एकदम सही है और आंटी के लिये जो कहा है(मालूम है दिल से कहा है) वो भी सही है।
खुश रहो, गुड लक।

मनोज कुमार ने कहा…

हम इसे सिंसियरली ले रहे हैं।
बैंकर नहीं हैं इसलिए कुछ समझे कुछ नहीं भी ...!

Suman ने कहा…

nice

Vivek Rastogi ने कहा…

अंकल जी डर्टी वाली फ़ोटू की आस थी, तो सब हँस लेते ;-), और वो बैंक वाला सर्टिफ़िकेट पास करने के लिये बधाई ।

सुरेन्द्र "मुल्हिद" ने कहा…

only one statement for your post....

oooh la la.....

Bharat Bhushan ने कहा…

बहुत दिनों के बाद आज एक डर्टी पिक्चर देखी है जिसने मेरे मित्र की छवि को उजला किया है. सोचालय से उपजी शायरी ख़ुसबूदार है. मैं स्वयं तुम्हें सीरियसली नहीं लेता क्यों कि तुम सिंसीयर हो, बैंक के काम में भी. इसी लिए तुम्हें अपनी जवानी को सँवारने वाले काम करने के लिए बैंक छुट्टी नहीं देता. कहाँ पटका? सिवालखास में. कहाँ है यह कमबख़्त नालियों वाला गाँव. उम्मीद है आंटियों को ऋण देते समय दस्तावेज़ जाँचने की कवायद भूले नहीं होगे. केवल उम्मीद ही की जा सकती है. सीएआईआईबी हो गई. वेतन वृद्धियाँ भी मिल गई होंगी, अब शादी कर लो यार. मैं जानता हूँ कि मानोगे नहीं. लेकिन आबाद रहो और शाद रहो!

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

अंकल! बहुत मज़ा आया पढ़कर!
आंटी को नमस्ते कहिएगा और ये झककास सा लुक ....कोई फिल्म मिली है क्या....?
औटोग्राफ प्लीज़ !

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

गिर गिर के धुलना,
चिन्ता में घुलना...

जय जय शिवशंकर...

vidhi panwar ने कहा…

gud one sir.........

ali ने कहा…

सी.ए.आई.आई.बी. होके गिरे या गिर के हुए हर सूरत में बधाई स्वीकारें :)

फोटो बड़ी शानदार , इन्क्रीमेंटयाफ्ता लग रही है :)

H P SHARMA ने कहा…

bhai asheesh aapkiposting kis jagah hai lagta hai ham paas pas hi hai. i am new branch manager at sbi someshwar

rashmi ravija ने कहा…

यानि कि गाँव भी अब बदल रहा है..पहले तो लोग 'अंकल' की जगह 'सर' कहा करते थे ..

सबकी बधाइयों से पता चल रहा है..आपने कोई इग्जाम-विग्जाम पास किया है..तो हमारी बधाई भी ले लीजिये...:)

इमरान अंसारी (عمران انصاری) ने कहा…

आप और आपकी बातें......इंटरटेंटमेंट.....इंटरटेंटमेंट और इंटरटेंटमेंट ......खैर आपकी सलाह पर कमेन्ट चिपका के चलते बनते हैं और आपसे अपने ब्लॉग पर आना तो कहना बेकार है :-)

दिगम्बर नासवा ने कहा…

किसी बात का न मलाल कर!
न अपना हाल बेहाल कर!
ग़ैरों के लिए जिया बहुत!
अब ज़रा खुद से प्यार कर!...

ये हलके में लेने वाली बात तो नहीं है हजूर ... और बेंक अधिकारी बन गए बातों ही बातों में ... बधाई हो .. वैसे जम रहे हैं अंकल जी ...

monali ने कहा…

Pic k screen par aane tak laga k faltu hi itti saari bakwaas padh rahe hain... fir pic dekh k laga k saarthak raha subeh-subeh ye panna kholna..
Aur haan sabse mast thi wo poem.. jo ek dum climax me hi aane layak thi.. climax achha ho to public interval se pehle ki bakwaas seh leti h...
On a serious note... very lovely lines.. keep writing... take care :)

sheetal ने कहा…

Aashish ji
aapka likhne ka andaaz accha laga,
aur aap dikh bhi khub rahe hain.
isi tarah likhte rahe,
hamesha khush rahe,
aur apni lekhni se logo
ke chehre par muskurahat dete rahe.

aur haan...kabhi waqt mile to mere
blog par bhi aaye.
http://kisseaurkahaniyonkiduniyaa.blogspot.com.
http://sheetalslittleworld.blogspot.com.

dil se ने कहा…

"ये अन्कलियत हलके में लेने वाली बात नहीं जनाब!!!
बाल कम हो रहे हैं तो वास्मोल और सफ़ेद हो रहे हों तो केवली तेल का इस्तेमाल सही रहेगा
आप को बड़े बड़े काम अंजाम देने हैं अभी...और हँ!!! आपको गिरना मुबारक!
"वो तिफ्ल क्या गिरेगा जो घुटनों.... " खैर पोस्ट बढ़िया रही..!!!"